Akola Health Deputy Director Transfer की खबर ने पूरे महाराष्ट्र में चर्चा छेडी है। अकोला स्वास्थ्य मंडल के उपनिदेशक डॉ. कमलेश भंडारी का शनिवार को अचानक तबादला कर दिया गया। उन पर जिला महिला अस्पताल में जनशक्ति आपूर्ति की निविदा प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं को बढ़ावा देने का आरोप है।
तबादले का कारण क्या था?
डॉ. भंडारी पर आरोप है कि उन्होंने Akola Health Deputy Director Transfer से पहले अपने कार्यकाल में 13 मुख्य नर्सों की शिकायतें 15 दिनों से अधिक समय तक दबाकर रखीं। इतना ही नहीं, जनशक्ति आपूर्ति हेतु निविदा प्रक्रिया में भी कई नियम तोड़े गए। इन सभी मामलों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
निविदा प्रक्रिया में गड़बड़ी
स्वास्थ्य विभाग की निविदा प्रक्रिया सामान्यतः पारदर्शी मानी जाती है। मगर इस बार स्थिति अलग थी।
- अकोला जिला महिला अस्पताल की जनशक्ति सहायता सेवा के लिए 72 बोलीदाताओं ने आवेदन किया।
- इनमें से सिर्फ चार बोलीदाता ही तकनीकी लिफाफा खोलने योग्य पाए गए।
- अंत में केवल दो बोलियों को अंतिम रूप दिया गया।
यह प्रक्रिया सरकारी दिशानिर्देशों का सीधा उल्लंघन थी।
तीन अधिकारी निलंबित
इस पूरे मामले के उजागर होने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई की। जिला शल्य चिकित्सक, चिकित्सा अधीक्षक और प्रशासनिक अधिकारी को निलंबित किया गया। इन अधिकारियों पर निविदा प्रक्रिया में लापरवाही और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप है।
याशिवाय, जिस स्वास्थ्य उपनिदेशक के कार्यक्षेत्र में यह सब हुआ, उनका भी अचानक तबादला कर दिया गया।
सीआरएम टीम के नाम पर वसूली
एक और गंभीर आरोप सामने आया है। बताया जाता है कि CRM टीम के नाम पर भी वसूली की गई। यह मामला सामने आने के बाद कई स्वास्थ्य कर्मियों ने प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल उठाए।
इससे, विभाग की विश्वसनीयता पर गहरी चोट पहुंची है।
तबादले की पृष्ठभूमि
डॉ. कमलेश भंडारी को स्वास्थ्य सेवा, संयुक्त निदेशक के पद पर स्थानांतरित किया गया। सामान्यत: किसी अधिकारी का कार्यकाल पूरा होने के बाद ही तबादला किया जाता है। लेकिन इस बार उनका कार्यकाल समाप्त होने से पहले ही उन्हें हटाया गया।
यह निर्णय बताता है कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है।
शिकायतों की अनदेखी
13 मुख्य नर्सों ने लिखित रूप से शिकायतें दर्ज की थीं। इन शिकायतों में अवैध प्रतिनियुक्तियाँ, निविदा प्रक्रिया की गड़बड़ी और वसूली जैसे मुद्दे शामिल थे। मगर, इन शिकायतों को 15 दिनों से अधिक समय तक दबाकर रखा गया।
इस कारण, नर्सों ने नाराजी व्यक्त की और यह मामला मीडिया तक पहुंचा।
मीडिया रिपोर्ट का असर
एक समाचार पत्र ने इस घोटाले पर विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित अधिकारियों को निलंबित किया और Akola Health Deputy Director Transfer का निर्णय लिया।
इससे साफ है कि चौथा स्तंभ यानी मीडिया, प्रशासन को जवाबदेह बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
सरकारी दिशानिर्देशों का उल्लंघन
सरकारी निविदा प्रक्रिया में पारदर्शिता, समयसीमा और तकनीकी योग्यता का पालन जरूरी होता है। लेकिन इस प्रकरण में:
- बोलीदाताओं को बिना कारण बाहर कर दिया गया।
- तकनीकी लिफाफा जांच में पक्षपात हुआ।
- नियमों का उल्लंघन कर चुनिंदा कंपनियों को लाभ दिलाया गया।
ये सभी तथ्य एक बड़े प्रशासनिक कदाचार की ओर इशारा करते हैं।
जनता की प्रतिक्रिया
अकोला जिले के नागरिकों ने इस मामले पर नाराजी व्यक्त की है। उनका कहना है कि जिस अस्पताल में महिलाएं और बच्चे इलाज के लिए आते हैं, वहां अनियमितताएं बर्दाश्त नहीं की जा सकतीं।
तसेच, स्वास्थ्य क्षेत्र में पारदर्शिता सबसे जरूरी है, क्योंकि इसका सीधा असर मरीजों के जीवन पर पड़ता है।
निष्कर्ष
Akola Health Deputy Director Transfer केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ एक संदेश है। यह मामला बताता है कि यदि शिकायतों को दबाया गया तो भी सच सामने आएगा। मीडिया और जनआंदोलन के दबाव में सरकार को कदम उठाना पड़ता है।
अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में अकोला स्वास्थ्य मंडल में कितनी पारदर्शिता लाई जाती है। जनता और स्वास्थ्यकर्मी उम्मीद कर रहे हैं कि ऐसी गड़बड़ियां दोबारा न हों।








